Pay Back to the Society Fund – An appeal

हमारे दुश्मनों द्वारा बहुजन समाज को ना केवल जाति-जाति में विभाजित किया है, बल्कि लाखों छोटे-छोटे संगठनों में भी विभाजित किया गया है। बामसेफ संगठन बहुजन समाज की 6000 जातियों को जोड़ने के साथ-साथ समाज के इन संगठनाओं को भी जोड़ने की रणनीति पर कार्यरत है। अकेले-अकेले लड़ने के बजाय मिल-जुलकर लड़ने की रणनीति पर हम कार्य कर रहे हैं। पहले चरण में हम अब तक बहुजन समाज के लगभग 10,000 से ज्यादा संगठनाओं को संपर्क करके जोड़ने में कामयाब हो चुके है, यह बहुत बड़ी उपलब्धी है। आज हमारे पास 31 राज्यों में, 542 जिलों में, 3500 तहसीलों में, 22 हजार ब्लोंको में और डेढ़ लाख गाँवों में संगठन का नेटवर्क फैला हुआ है| ऐसा संगठन का जाल फुले-शाहू-पेरियार-अम्बेडकरी आन्दोलन के इतिहास में पहली बार हुआ है| इससे हमारा जनाधार व्यापक होकर विशाल जन-शक्ति का निर्माण होगा। इस संगठन के जाल को आधार बनाकर विशाल जन आन्दोलन खड़ा करना ज्यादा मुश्किल काम नहीं है, मगर इसमें बड़ा अवरोध है - आर्थिक संसाधनों का अभाव| आर्थिक संसाधनों के अभाव की पूर्ति करने से आन्दोलन स्वतंत्र, स्वावलंबी और आत्मनिर्भर हो सकता है|

हमारे मूलनिवासी बहुजन समाज के महामानवों के 108 साल के अथक प्रयासों के कारण हमें लोकतंत्र, संविधान और वोट का अधिकार हासिल हुआ। वर्तमान में ईवीएम द्वारा हमारा लोकतंत्र, संविधान और वोट का मौलिक अधिकार सब कुछ खत्म कर दिया गया है। ईवीएम के विरोध में आन्दोलन चलाने वाले राजनीतिक दलों को सरकार द्वारा ईडी/सीबीआई का डर दिखा कर चुप कराया गया है। आज ईवीएम के मुद्दे पर देशभर में केवल बामसेफ और बामसेफ के सभी सहयोगी संगठन ही आन्दोलन करते हुए दिखायी दे रहे है। आने वाले समय में ईवीएम विरोधी आन्दोलन की और ज्यादा निर्णायक लड़ाई लड़ी जायेगी।

सन 2001 में डॉ. माईकल बामशाद के डीएनए रिपोर्ट से ब्राह्मण विदेशी साबित हुए थे। हाल ही में राखीगढ़ी में ब्राह्मणों का डीएनए नहीं मिला क्योंकि उस समय तक ब्राह्मणों का भारत पर आक्रमण नहीं हुआ था। आज विदेशी ब्राह्मणों ने भारत के सभी प्रकार के अंगों पर नियंत्रण किया हुआ है, जिससे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से ब्राह्मणों के नियंत्रण वाला गुलाम भारत बन चूका है| इसे बदलने के लिए देशव्यापी जनांदोलन की आवश्यकता है|

मूलनिवासी बहुजन समाज की आजादी की लड़ाई अब निणार्यक मोड़ पर आ चुकी है| हमारे आन्दोलन का भौगोलिक और सामाजिक विस्तार 6 लाख गाँवों में और 6000 जातियों में करने के लिए कश्मीर से कन्याकुमारी तक 6000 किलोमीटर की राष्ट्रीय स्तर की पैदल यात्रा निकाली जायेगी। साथ में ईवीएम की राष्ट्रव्यापी भंडा फोड़ परिवर्तन यात्रा कश्मीर से कन्याकुमारी तक दोबारा निकाली जायेगी। ओबीसी की जाती आधारित जनगणना के समर्थन में राष्ट्रव्यापी आन्दोलन खड़ा किया जायेगा| सरकारी कंपनियों का निजीकरण कराकर आरक्षण को समाप्त करने के विरोध में राष्ट्रव्यापी आन्दोलन किया जायेगा| मीडिया का निर्माण किया जायेगा जिसके तहत इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट एवम् सोशल मीडिया का निर्माण और उसका विस्तार किया जायेगा| सभी मूलनिवासी महापुरुषों के विचारों का प्रचार एवं प्रसार करने के लिए नया साहित्य निर्माण करके मूलनिवासी बहुजन समाज तक पहुँचाया जायेगा। मानवीय संसाधन और उनका विकास करने हेतु हम नालंदा और तक्षशीला जैसे सेंटर खड़े करना चाहते हैं| जिसके लिए सभी भाषा में ट्रेनिंग देने और तुलनात्मक अध्ययन करने हेतु ट्रेनिंग सेंटर का निर्माण किया जायेगा। जनांदोलन को राष्ट्रव्यापी बनाने के लिए 10000 पूर्ण कालीन कार्यकर्ताओं का निर्माण किया जायेगा| बहुजन क्रांति मोर्चा के माध्यम से 5 लाख संगठनों को जोड़ कर 100000 संघर्ष के सेंटर निर्माण किया जायेंगे|

आज संगठन के पास स्पष्ट उद्देश्य, विचारधारा, नीति, नेतृत्व और कार्यक्रम है। हमने उद्देश्य और विचारधारा को लेकर आज तक कोई समझौता नहीं किया और ना ही आगे करने वाले है। संगठन के पास भविष्यकालीन सफलता की रणनीति भी है। संगठन के पास त्यागी, समर्पित, एवं कर्मठ कार्यकर्ता है और इसके कारण समाज की संगठन से अपेक्षा बढ़ी हुई है। देशभर में क्रांतिजन्य परिस्थिति है। आज हमारे सामने साधन-संसाधनों के अभाव की चुनौती है। जिसके कारण हम क्रांतिसदृश परिस्थिति को जन आन्दोलन में रूपांतरित नहीं कर पा रहे हैं। क्रांति की अपेक्षा और साधन-संसाधनों की उपेक्षा करके हम सफल नहीं हो सकते।

दुनिया में कोई भी परिवर्तन मुफ्त में ना हुआ है और ना ही होता है। कीमत चुकाये बगैर परिवर्तन संभव नहीं है। स्वाभिमानी, आत्मनिर्भर आंदोलन ही अपने महापुरषों के आधे अधूरे कार्य को पूरा कर सकता है। लड़ाई अगर हमारी है तो साधन भी हमें ही लगाने होंगे। इसी लिए महापुरुषों ने हमारे समाज में बुद्धिजीवी वर्ग का निर्माण किया| डॉक्टर, इंजीनियर, अधिवक्ता, प्रोफेसर, अधिकारी, कर्मचारियों का निर्माण किया जिससे हमारे आंदोलन में साधन संसाधनों की कोई कमी ना रहे। आंदोलन चलाने के लिए बुद्धि, समय, पैसा, हुनर, और श्रम की जरूरत है। शक्तिहीन, साधनहीन, समाज का कोई आंदोलन सफल नहीं हो सकता। आंदोलन की सफलता साधनों पर निर्भर है। जिनके विरोध में हमारा संघर्ष है उनके पास असीमित साधन-संसाधन है, ऐसी स्थिति में उनका मुकाबला करना है तो हमें भी उसी अनुपात में साधन-संसाधन निर्माण करने होंगे तभी हमारा संघर्ष सफल हो सकता है।

अतः मूलनिवासी बहुजन समाज के बुद्धिजीवी वर्ग से अपील है कि इस आंदोलन को सफल बनाने के लिए ज्यादा से ज्यादा साथ सहयोग करें।


Bahujan society has not only been divided into caste and sub caste by our enemy, but also has been divided into millions of small organizations. The BAMCEF organization is working on a strategy to organize the 6000 castes, along with all those organizations of the Bahujan society. We are working on a strategy to fight unitedly, instead of fighting alone. In the first phase, we have, so far, are successful in organizing more than 10,000 organizations of the Bahujan society, this is a big achievement. Today, we have a network of organization spread in 31 states, in 542 districts, in 3500 tehsils, in 22 thousand blocks and in 1.5 lakh villages. Such a web of organization has been created for the first time in the history of Phule-Shahu-Periyar-Ambedkar movement. This will broaden our mass support and raise a huge manpower. It is not a difficult task to build a large mass movement on the basis of this web of organization, but there is a big barrier in it – lack of economic resources. The movement can become independent, self-reliant and self-sufficient by fulfilling the lack of economic resources.

Due to the 108 years of relentless efforts of the great leaders of our Mulnivasi (indigenous) Bahujan Samaj, we got democracy, Constitution and the right to vote. At present, all our democracy, Constitution and fundamental right to vote have been destroyed by the EVM. Political parties running the movement against the EVM have been silenced by the government showing fear of ED/CBI. Today, only the BAMCEF and all the BAMCEF-allied organizations are seen agitating on the issue of EVM. In the coming time, a more decisive battle of the anti-EVM movement will be fought.

According to the DNA report of 2001 by Dr. Michael Bamshad, Brahmins are proved to be foreigners. Recently, no Brahmin DNA was found in Rakhigarhi, because by that time invasion of India by Brahmins had not occurred. Today, foreign Brahmins have established control over all the kinds of organs of India, due to which it has become a slave India, directly or indirectly controlled by Brahmins. To change this a nationwide mass movement is necessary.

Now, the struggle of freedom of the Mulnivasi Bahujan Samaj has come to a decisive turn. To expand the Geographical and Social Network of our movement to 6 lakh villages and 6000 castes, a 6000 Km national level Padayatra (Feet March) from Kashmir to Kanyakumari will be organized. Along with this, a nationwide Parivartan Yatra (Transformation March) will be organized once again from Kashmir to Kanyakumari in order to expose the EVM scandal. A nationwide movement will be raised in the support of caste-based census of the OBC. A nationwide movement will be raised against the destruction of reservation by privatizing government companies. Creation of media will be undertaken under which electronic, print and social media will be created and expanded. In order to propagate and disseminate the thoughts of all the great Mulnivasi (indigenous) heroes, new literature will be created and taken to the Mulnivasi Bahujan society. In order to create and develop human resources, we want to build centers like Nalanda and Taxila. For this, a training center will be created for imparting training in all the languages and for comparative studies. In order to effect the mass movement nationwide 10000 full time workers (cadre) will be created. Five lakh (500000) organizations will be connected through the Bahujan Kranti Morcha, and 100000 combat centers will be created.

Today the organization has a clear objective, ideology, policy, leadership and program. Till date, we did not make any compromise with the objective and ideology, nor are we going to do it in future. The organization also has the strategy to success in future. The organization has sacrificing, dedicated and diligent activists, and due to this expectations of the society from the organization have increased. There is a pro-revolution situation across the country. Today, we face the challenge of lack of resources, due to which we are not able to transform the pro-revolution situation into a mass movement. We cannot become successful by expecting the revolution, and neglecting the sources and resources.

No change in the world has occurred for free, nor does it occur for free. Change is not possible without paying the price. A self-respecting, self-reliant movement only can fulfil the unfulfilled task of our great heroes. If the struggle is ours, we have to apply our own means. That is why great heroes have created the intellectual class in our society. Doctor, engineer, advocate, professor, officer, staff were created so that there should not be any shortage of sources and resources in our movement. For running a movement talent, time, money, skill and hard-work are required. Movement of a society devoid of strength and resources cannot be successful. Success of the movement depends on the means. Those against whom we are struggling, have unlimited sources and resources. In such a situation, if we want to fight against them, we also have to generate sources and resources in the same proportion, then only our struggle can be successful.

Therefore, we appeal to the intellectual class from the Mulnivasi Bahujan society to extend maximum support and cooperation to make this movement successful.

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